महाबोधि बुद्ध विहार में उत्साह से मनाया स्वतंत्रता दिवस
mahabodhi-15-8-26
वामनदादा कर्डक की जयंती पर सामाजिक समरसता, शांति और समानता का संदेश
मूकनायक समाचार । सूरत
लिंबायत क्षेत्र के शांतिनगर-नीलगिरी स्थित विश्व शांतिदूत महाबोधि बुद्ध विहार में शनिवार को देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भिक्खु संघ की गरिमामयी उपस्थिति में ध्वजारोहण एवं ध्वजवंदन समारोह आयोजित किया गया। साथ ही लोककवि वामनदादा कर्डक की 104वीं जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
समारोह में पूज्य भंते धम्म रक्षित महाथेरो के करकमलों से ध्वजारोहण एवं ध्वजवंदन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व शांतिदूत महाबोधि बुद्ध विहार के संस्थापक-अध्यक्ष सुभाष पी. झाड़े ने की। इस दौरान पूज्य भंते आनंद (सामनेर) एवं पूज्य भंते धम्म ज्योति की विशेष उपस्थिति रही। भिक्खु संघ की उपस्थिति से समारोह का वातावरण आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी बना रहा।
कार्यक्रम में लोककवि वामनदादा कर्डक एकता कलामंच, सूरत के संस्थापक-अध्यक्ष एवं विश्व शांतिदूत महाबोधि बुद्ध विहार के उपप्रमुख बौद्धाचार्य गण गोविंद पिंपलिसकर, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) की सूरत शहर प्रमुख आशाताई मांगले, धम्म सेवक एवं प्रबोधनकार आद. भास्कर वानखड़े, BAMCEF सूरत जिला प्रभारी सुभाष धुरंधर, ब्रह्माकुमारी चेतनाबेन, विमलबेन एवं प्रभाबेन सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
स्वतंत्रता के मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, बंधुत्व, न्याय और मानवीय गरिमा की स्थापना का संकल्प भी है। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मैत्री के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज में आपसी भाईचारा मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अध्यक्षीय संबोधन में सुभाष पी. झाड़े ने कहा कि महाबोधि बुद्ध विहार केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति, शिक्षा, मानवतावादी विचार, समानता और बंधुत्व का संदेश देने वाला केंद्र है। उन्होंने संविधान के मूल्यों का सम्मान करते हुए सामाजिक न्याय और शांति के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वामनदादा कर्डक की जयंती पर साहित्यिक योगदान को किया याद
लोककवि वामनदादा कर्डक की 104वीं जयंती के अवसर पर उपस्थित मान्यवरों ने उनके सामाजिक एवं साहित्यिक योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि कर्डक ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, समानता और वंचित समाज की आवाज को मजबूती दी। उनकी रचनाएं आज भी समाज को संघर्ष, स्वाभिमान और परिवर्तन की प्रेरणा देती हैं।
इस अवसर पर नंदाताई इंगले ने लोककवि वामनदादा कर्डक की रचना पर आधारित गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।
बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाओं की सहभागिता
कार्यक्रम में श्रीकृष्ण वानखड़े, उपाध्यक्ष; महामंत्री गणेश अंभोरे; संजय पवार; भागवत वानखेडे; मोहड़ एवं चव्हाण साहेब सहित अनेक धम्मबंधु-उपासक एवं उपासिकाएं उपस्थित रहे। सभी उपासक-उपासिकाओं तथा अतिथियों का स्वागत आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने किया।
समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता एवं अखंडता बनाए रखने, संविधान के मूल्यों का सम्मान करने तथा समाज में शांति, समानता और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। भिक्खु संघ, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रद्धावान धम्मबंधु-उपासक एवं उपासिका संघ की बहुसंख्यक सहभागिता से समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


